असम में नए उर्वरक संयंत्र की नींव: डिब्रूगढ़ परियोजना से पूर्वोत्तर को मिलेगा औद्योगिक और कृषि संबल

December 24, 2025 8:53 AM
Follow :

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के डिब्रूगढ़ ज़िले में एक महत्वाकांक्षी अमोनिया–यूरिया उर्वरक संयंत्र की आधारशिला रखी है, जिसकी अनुमानित लागत ₹10,601 करोड़ है। यह परियोजना पूर्वोत्तर भारत में कृषि और उद्योग को नई गति देने के उद्देश्य से शुरू की गई है और इसे क्षेत्रीय विकास के लिहाज़ से एक अहम कदम माना जा रहा है।

यह संयंत्र “असम वैली फर्टिलाइजर एंड केमिकल कंपनी लिमिटेड” (AVFCCL) द्वारा विकसित किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि आधुनिक और ऊर्जा-कुशल तकनीक पर आधारित यह इकाई उर्वरक उत्पादन को टिकाऊ बनाने में मदद करेगी।

ब्राउनफील्ड परियोजना के जरिए उत्पादन क्षमता में विस्तार

नया उर्वरक संयंत्र ब्रह्मपुत्र वैली फर्टिलाइज़र कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BVFCL) के नमरूप स्थित मौजूदा परिसर में स्थापित किया जा रहा है। ब्राउनफील्ड मॉडल पर आधारित इस परियोजना से हर वर्ष लगभग 12.7 लाख मीट्रिक टन यूरिया उत्पादन की क्षमता विकसित की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार संयंत्र को वर्ष 2030 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके संचालन में आने के बाद भारत की उर्वरक आपूर्ति प्रणाली को मजबूती मिलेगी और आयात पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी।

पूर्वोत्तर अर्थव्यवस्था और रोजगार को बढ़ावा

केंद्र सरकार का कहना है कि इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। निर्माण, संचालन, मरम्मत सेवाओं, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे सहायक क्षेत्रों में भी गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

संयंत्र की स्थापना से स्थानीय स्तर पर उर्वरकों की उपलब्धता बेहतर होगी, जिससे परिवहन लागत में कमी आएगी। इसका सीधा लाभ असम सहित आसपास के राज्यों के किसानों को मिलेगा।

कृषि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की रणनीति

यह उर्वरक इकाई असम के अलावा पूर्वोत्तर राज्यों, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में यूरिया की मांग को पूरा करने में मदद करेगी। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देश में घरेलू यूरिया उत्पादन 2014 में 225 लाख मीट्रिक टन था, जो 2023–24 में बढ़कर 306 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है।

सरकार इसे कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रही है, जिससे किसानों को समय पर और किफायती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराया जा सकेगा।

नीतिगत दृष्टिकोण और क्षेत्रीय विकास का फोकस

यह परियोजना केंद्र सरकार की आत्मनिर्भर उर्वरक नीति और पूर्वोत्तर भारत के कृषि-औद्योगिक विकास लक्ष्यों से जुड़ी हुई है। इसे पुराने उर्वरक संयंत्रों के आधुनिकीकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सरकार का मानना है कि ऐसी परियोजनाएं न केवल कृषि उत्पादन को स्थिरता प्रदान करेंगी, बल्कि पूर्वोत्तर भारत के समग्र आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment