दुनिया भर में डिफ़ॉल्ट सर्च इंजन के रूप में पहचानी जाने वाली गूगल—जो अल्फाबेट इंक की प्रमुख इकाई है—को अपने क्रोम वेब ब्राउज़र को बेचने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा। यह फैसला एक संघीय न्यायाधीश ने मंगलवार को बाजार बंद होने के बाद सुनाया।
इस निर्णय के तुरंत बाद अल्फाबेट के शेयरों में 8% तक की तेज़ी आई और नैस्डैक फ्यूचर्स भी ऊपर चढ़ गए। यह फैसला अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के लिए झटका माना जा रहा है, जिसने 2020 में गूगल पर एंटीट्रस्ट का मामला दायर किया था।
न्यायाधीश अमित मेहता ने गूगल को इंटरनेट सर्च के लिए ऐप्पल के साथ विशेष अनुबंध करने से रोक दिया, लेकिन उन सौदों की अनुमति दी, जिनमें क्रोम को डिफ़ॉल्ट ब्राउज़र के रूप में पेश करने का विकल्प दिया जाता है। उनका कहना था कि यदि गूगल को वितरण साझेदारों को भुगतान करने से रोका गया, तो बाज़ार और उपभोक्ताओं को भारी नुकसान हो सकता है।
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पिछले वर्ष एक अन्य अमेरिकी अदालत ने पाया था कि गूगल ने ऑनलाइन सर्च और विज्ञापन बाज़ार पर अवैध रूप से एकाधिकार कर लिया है। इस मामले में अंतिम फैसला 10 सितंबर को आएगा।
ऐप्पल के डिवाइस—Mac और iPhone—पर Safari ब्राउज़र में Google को डिफ़ॉल्ट सर्च इंजन बनाए रखने का समझौता जारी रहेगा, जिससे ऐप्पल को लगभग 20 बिलियन डॉलर तक की कमाई होती है। इस खबर के बाद ऐप्पल के शेयरों में भी 3% तक का उछाल आया।
न्यायाधीश मेहता ने कहा कि सरकार ने गूगल की संपत्तियों को जबरन बेचने की मांग कर अतिशयोक्ति की है, क्योंकि इनका उपयोग किसी भी अवैध प्रतिबंध को लागू करने के लिए नहीं किया गया।
साथ ही, गूगल को वेब विज्ञापन तकनीक पर एक और एंटीट्रस्ट केस का सामना करना पड़ रहा है। इस साल वर्जीनिया की अदालत ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया था और सितंबर में यह तय होगा कि क्या गूगल को विज्ञापन तकनीक वाले टूल्स बेचने के लिए मजबूर किया जाए।










