रांची, 2 सितंबर – झारखंड सरकार ने विस्थापितों के अधिकारों की रक्षा के लिए झारखंड राज्य विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में आयोग के नियमों और दायित्वों को अंतिम रूप दिया गया।
आयोग में एक अध्यक्ष और दो सदस्य होंगे। अध्यक्ष को पुनर्वास मामलों में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव होना अनिवार्य होगा। दो सदस्यों में एक सेवानिवृत्त प्रशासनिक सेवा अधिकारी और दूसरा सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश होगा। आयोग का कार्यकाल अधिकतम तीन वर्ष तय किया गया है।
कैबिनेट बैठक में कुल 66 प्रस्तावों को मंजूरी मिली। इसमें दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन को आवंटित सरकारी आवास उनकी पत्नी रूपी सोरेन को आजीवन आवंटित करने का निर्णय भी शामिल है।
कला, साहित्य और पर्यटन को बढ़ावा
बैठक में झारखंड राज्य ललित कला अकादमी, झारखंड साहित्य अकादमी और झारखंड राज्य संगीत नाटक अकादमी की स्थापना को स्वीकृति मिली। इसके अलावा झारखंड पर्यटन विकास एवं पंजीकरण अधिनियम में संशोधन को भी मंजूरी दी गई।
बांध और जलाशय परियोजनाओं को बढ़ावा
राज्य के 35 बांधों के पुनर्वास एवं सुधार के लिए ₹238 करोड़ स्वीकृत किए गए, जिनमें 70% राशि विश्व बैंक और 30% राशि राज्य सरकार वहन करेगी। साथ ही पुनासी जलाशय परियोजना के लिए ₹1,891.67 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।
जेएसएससी परीक्षाओं में बदलाव
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) अब विशेष योग्यता वाले पदों की परीक्षाएँ दो चरणों – प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा – में आयोजित करेगा। हालाँकि, यदि आवेदनों की संख्या 50,000 से कम होती है तो प्रारंभिक परीक्षा नहीं होगी।
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मरांग गोमके छात्रवृत्ति का वितरण तय
कैबिनेट ने मरांग गोमके प्रवासी छात्रवृत्ति योजना के तहत 50 छात्रवृत्तियों का श्रेणीवार वितरण भी तय किया – अनुसूचित जनजाति (20), अनुसूचित जाति (10), अल्पसंख्यक (6) और अन्य पिछड़ा वर्ग (14)।
पाँच डॉक्टर बर्खास्त, पाँच कर्मियों को लाभ
लंबे समय से अनुपस्थित पाँच डॉक्टरों – डॉ. फरहाना, डॉ. ज्योति कुमारी, डॉ. भावना, डॉ. इंद्रनाथ प्रसाद और डॉ. रिंकू सिंह – की बर्खास्तगी को मंजूरी मिली। इसके साथ ही वाणिज्यिक कर विभाग के पाँच कर्मचारियों के सेवा नियमितीकरण और वित्तीय लाभ को भी हरी झंडी मिली।











