नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में चल रही जीएसटी परिषद की बैठक में जीएसटी दरों में कटौती पर अहम फैसला हो सकता है। अगर परिषद स्वास्थ्य और टर्म इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी कम करने को मंजूरी देती है, तो उपभोक्ताओं के लिए बीमा पॉलिसी सस्ती हो सकती हैं।
बैठक में मौजूदा कई जीएसटी स्लैब को हटाकर केवल 5% और 12% की दर लागू करने का प्रस्ताव चर्चा में है। फिलहाल इन बीमा उत्पादों पर 18% जीएसटी लागू है।
एचएसबीसी सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स (इंडिया) की रिपोर्ट के अनुसार, दर में कटौती से बीमा कंपनियों के मुनाफे पर अल्पकालिक दबाव पड़ सकता है। इसका कारण मौजूदा पॉलिसियों के पुनर्मूल्य निर्धारण (रीप्राइसिंग) की धीमी गति है, जिसमें 12 से 18 महीने लग सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक,
- यदि स्वास्थ्य बीमा पर पूरी तरह से जीएसटी छूट दी जाती है, तो प्रीमियम लगभग 15% तक घट सकता है।
- यदि जीएसटी दर 18% से घटाकर 12% की जाती है, तो पॉलिसीधारकों की लागत में भी कमी आएगी।
- हालांकि, इस कदम से सालाना 1.2 से 1.4 अरब डॉलर तक राजस्व में कमी हो सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि स्टैंडअलोन स्वास्थ्य बीमा कंपनियों पर बहु-लाइन बीमा कंपनियों की तुलना में ज्यादा असर पड़ सकता है। वहीं, इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की उपलब्धता या अनुपलब्धता भी बीमा कंपनियों के खर्च और लाभ पर असर डालेगी।
हालांकि अल्पकालिक चुनौतियाँ रहेंगी, लंबी अवधि में बीमा क्षेत्र के विकास की संभावनाएँ बेहतर मानी जा रही हैं।
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