हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। इस समय श्राद्ध, तर्पण और पितरों के लिए भोजन अर्पण किया जाता है। मान्यता है कि पितृ पक्ष के 16 दिनों में हमें अपने खान-पान और जीवनशैली में खास सावधानी रखनी चाहिए। एक महत्वपूर्ण सवाल अक्सर पूछा जाता है – पितृ पक्ष में गूंथा हुआ आटा फ्रिज में क्यों नहीं रखना चाहिए?
धार्मिक कारण
- श्राद्ध काल में शुद्धता का महत्व – पितृ पक्ष में भोजन को ताजा और सात्विक रखा जाता है। फ्रिज में रखा आटा बासी माना जाता है, और बासी भोजन पितरों को अर्पण नहीं किया जाता।
- बासी भोजन पितरों के प्रति अपमान – मान्यता है कि बासी या एक दिन पुराना भोजन पितरों को अर्पण करने से उनका आशीर्वाद नहीं मिलता।
- आटे में ऊर्जा का क्षय – गूंथे आटे में जीव तत्व (सूक्ष्म ऊर्जा) होती है। फ्रिज में रखने से यह ऊर्जा नष्ट हो जाती है।
वैज्ञानिक कारण
- बैक्टीरिया का खतरा – गूंथे आटे में नमी अधिक होती है। फ्रिज में रखने पर बैक्टीरिया और फंगस जल्दी पनप जाते हैं।
- ग्लूटेन स्ट्रक्चर खराब होना – लंबे समय तक रखने से आटे का ग्लूटेन टूट जाता है, जिससे रोटियां सख्त और बेस्वाद हो जाती हैं।
- खाद्य विषाक्तता का खतरा – बासी आटा शरीर में गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।
परंपरा और आधुनिक जीवन का संतुलन
- अगर पितृ पक्ष में समय की कमी हो तो आटा उसी समय गूंथकर तुरंत उपयोग करना ही सबसे अच्छा है।
- आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में लोग आटा पहले से गूंथकर रखते हैं, लेकिन पितृ पक्ष के दौरान ऐसा करना उचित नहीं माना जाता।
पितृ पक्ष में अपनाने योग्य नियम
- ताजा भोजन बनाकर ही पितरों को अर्पित करें।
- बासी, जूठन या फ्रिज का भोजन न करें।
- सात्विक और शुद्ध सामग्री का प्रयोग करें।
- आटे या खाने की कोई भी चीज रातभर फ्रिज में न रखें।
पितृ पक्ष में गूंथा हुआ आटा फ्रिज में रखना न तो धार्मिक रूप से सही है और न ही वैज्ञानिक दृष्टिकोण से। इसलिए इस समय ताजा और शुद्ध भोजन बनाना ही सबसे अच्छा है। इससे पितरों की आत्मा तृप्त होती है और घर-परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है।
FAQ
Q. क्या पितृ पक्ष में बासी रोटी खा सकते हैं?
👉 नहीं, बासी भोजन पितरों को अर्पण नहीं किया जाता।
Q. क्या पितृ पक्ष में रात का खाना फ्रिज में रख सकते हैं?
👉 नहीं, केवल ताजा और शुद्ध भोजन ही स्वीकार्य है।
Q. क्या फ्रिज में रखा गूंथा आटा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है?
👉 हाँ, इससे गैस, एसिडिटी और बैक्टीरिया का खतरा बढ़ता है।





