बुधवार (3 सितंबर) को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15 पैसे मज़बूती दिखाते हुए 88.00 के स्तर पर पहुँचा। हालाँकि यह अब भी अपने सर्वकालिक निम्न स्तर के पास बना हुआ है। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी और डॉलर की मजबूती से निवेशकों की धारणा पर दबाव बना हुआ है।
विदेशी मुद्रा व्यापारियों के अनुसार, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के कारण रुपया कमजोर दायरे में कारोबार कर रहा है। घरेलू शेयर बाज़ार में गिरावट ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाज़ार में रुपया 88.15 पर खुला और 88.00 के स्तर तक पहुँचा, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 15 पैसे की बढ़त है। मंगलवार (2 सितंबर) को रुपया डॉलर के मुकाबले 5 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 88.15 पर बंद हुआ था।
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फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि रुपया हल्की मजबूती के साथ खुला, लेकिन डॉलर की लगातार खरीदारी इसे फिर नीचे धकेल सकती है। उन्होंने बताया कि प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा एसएमबीसी बैंक की 1.6 अरब डॉलर की हिस्सेदारी खरीद को मंज़ूरी मिलने के बाद विदेशी निवेश से रुपये को कुछ स्थिरता मिल सकती है। उनका अनुमान है कि रुपया फिलहाल 87.80 से 88.30 के दायरे में रह सकता है, जबकि यह भी देखना होगा कि आरबीआई 88.30 के स्तर पर कोई हस्तक्षेप करता है या नहीं।
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर इंडेक्स 0.09% की बढ़त के साथ 98.48 पर पहुँच गया। वैश्विक बाज़ार में ब्रेंट क्रूड का वायदा 0.27% फिसलकर 68.95 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। घरेलू शेयर बाज़ार में सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 153.28 अंक गिरकर 80,004.60 पर और निफ्टी 46.4 अंक गिरकर 24,533.20 पर पहुँच गया।










