ट्रंप का नया फैसला: H-1B visa पर 100,000 डॉलर शुल्क, भारतीयों के लिए बढ़ी मुश्किलें

September 20, 2025 1:15 PM
Follow :
H-1B visa

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आव्रजन नियमों को और सख्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अब H-1B visa आवेदकों को 100,000 डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) का शुल्क देना होगा। यह बदलाव खासकर आईटी और टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जो बड़ी संख्या में भारत और चीन के पेशेवरों पर निर्भर करती हैं।

ट्रंप का कहना है कि यह कदम सुनिश्चित करेगा कि अमेरिका में आने वाले लोग वास्तव में “उच्च कौशल” वाले हों और अमेरिकी नागरिकों की नौकरियाँ न छिनें। व्हाइट हाउस के अधिकारी विल शार्फ ने H-1B को सबसे अधिक दुरुपयोग किए जाने वाले वीज़ा कार्यक्रमों में से एक बताया और कहा कि भारी शुल्क से केवल योग्य उम्मीदवार ही आवेदन करेंगे।

H-1B visa क्या है?

H-1B वीज़ा एक अस्थायी कार्य वीज़ा है, जिसके ज़रिए अमेरिकी कंपनियाँ विदेशों से विशेषज्ञ पेशेवरों को नियुक्त कर सकती हैं। इसे पहली बार 1990 में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित जैसे क्षेत्रों में कमी को पूरा करने के लिए शुरू किया गया था। यह वीज़ा तीन साल के लिए जारी होता है और इसे अधिकतम छह साल तक बढ़ाया जा सकता है।

भारतीयों पर असर

अमेरिका में H-1B वीज़ा धारकों में भारतीय सबसे आगे हैं। आँकड़ों के अनुसार, 2024 में H-1B वीज़ा के 71% लाभार्थी भारतीय थे। अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा जैसी कंपनियों को हजारों वीज़ा स्वीकृत हुए थे। लेकिन अब नए शुल्क नियमों के कारण भारतीयों पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। ग्रीन कार्ड प्रक्रिया की लंबी प्रतीक्षा अवधि इस स्थिति को और कठिन बना देती है।

‘गोल्ड कार्ड’ योजना

इसके साथ ही ट्रंप ने एक नई ‘गोल्ड कार्ड’ वीज़ा योजना भी शुरू की है। इसके तहत व्यक्तिगत आवेदकों के लिए 10 लाख डॉलर और कंपनियों के लिए 20 लाख डॉलर की फीस तय की गई है। इसका उद्देश्य केवल “शीर्ष स्तर के प्रतिभाशाली और समृद्ध व्यक्तियों” को अमेरिका में आने की अनुमति देना है। ट्रंप का दावा है कि इससे अमेरिका को अरबों डॉलर का राजस्व मिलेगा और देश में रोजगार बढ़ेगा।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment